Breaking News

परीक्षा छोड़ने तक की नौबत! बुर्के को लेकर सेंटर पर हुआ ऐसा विवाद, छात्रा का बयान वायरल

 


देशभर में आयोजित किए जा रहे नीट री-एग्जाम के बीच राजस्थान से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा केंद्रों पर लागू ड्रेस कोड, धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ब्यावर की रहने वाली एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि परीक्षा केंद्र पर उसे बुर्का और दुपट्टा पहनकर प्रवेश करने से रोका गया, जिससे वह काफी नाराज हो गई। छात्रा का कहना है कि उसके लिए उसकी धार्मिक पहचान और बुर्का बेहद महत्वपूर्ण है और यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने धार्मिक परिधानों की अनुमति दी है, तो परीक्षा केंद्र पर इस तरह की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया का पालन करना सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से जरूरी है। फिलहाल परीक्षा केंद्र प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

परीक्षा केंद्र पर पहुंची छात्रा, प्रवेश को लेकर हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, राजस्थान के ब्यावर से आई अभ्यर्थी कुलसुम बानो नीट री-एग्जाम देने के लिए निर्धारित परीक्षा केंद्र पहुंची थीं। छात्रा का आरोप है कि उन्हें पहले दुपट्टा हटाने और बाद में बुर्का उतारने के लिए कहा गया। उन्होंने दावा किया कि 3 मई को आयोजित मुख्य परीक्षा के दौरान उन्होंने इसी तरह का पहनावा अपनाया था और तब किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई थी।

कुलसुम बानो का कहना है कि इस बार परीक्षा केंद्र पर उनसे अलग व्यवहार किया गया, जिससे वह आहत हुईं। उन्होंने कहा कि उनके लिए उनकी धार्मिक पहचान महत्वपूर्ण है और वे इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। छात्रा ने यह भी कहा कि यदि एनटीए की गाइडलाइंस धार्मिक परिधानों की अनुमति देती हैं, तो उन्हें परीक्षा देने से रोकना उचित नहीं है।

"मेरे लिए मेरी पहचान ज्यादा जरूरी है"

मीडिया से बातचीत में छात्रा ने कहा कि उनके लिए केवल परीक्षा ही सब कुछ नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान और उससे जुड़े परिधान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि वे नियमों का सम्मान करती हैं, लेकिन उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया गया।

छात्रा का कहना है कि यदि सुरक्षा जांच की जरूरत थी तो वह उसके लिए तैयार थीं, लेकिन सीधे तौर पर बुर्का हटाने की बात कहे जाने से उन्हें असहज महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर संवेदनशीलता और स्पष्टता दोनों जरूरी हैं ताकि किसी भी अभ्यर्थी को अपमानित महसूस न हो।

क्या कहते हैं NTA के नियम?

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नीट यूजी 2026 परीक्षा में बुर्का, हिजाब, पगड़ी और अन्य धार्मिक या पारंपरिक परिधानों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, ऐसे उम्मीदवारों के लिए कुछ विशेष नियम निर्धारित किए गए हैं। इनमें निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना, अतिरिक्त सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया शामिल है।

एनटीए की गाइडलाइंस के मुताबिक धार्मिक परिधान पहनने वाले उम्मीदवारों को समय से पहले पहुंचना होता है ताकि सुरक्षा जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। महिला उम्मीदवारों की जांच महिला स्टाफ द्वारा की जाती है और पूरी प्रक्रिया गोपनीयता तथा सम्मान के साथ पूरी की जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

क्या परीक्षा केंद्र अपने नियम बना सकते हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एनटीए द्वारा किसी प्रकार के धार्मिक या पारंपरिक परिधान की अनुमति दी गई है, तो कोई भी परीक्षा केंद्र अपने स्तर पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा सकता। हालांकि केंद्र अधीक्षक को सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त जांच की प्रक्रिया अपनाने का अधिकार होता है। ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को पहचान सत्यापन और सुरक्षा जांच में सहयोग करना होता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसके साथ नियमों के विपरीत व्यवहार किया गया है, तो वह एनटीए या संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है। वहीं परीक्षा केंद्रों की भी जिम्मेदारी है कि वे दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उम्मीदवारों के सम्मान और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और परीक्षा केंद्रों पर उसका सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए पहचान सत्यापन अनिवार्य है और इसके लिए सभी उम्मीदवारों को समान नियमों का पालन करना चाहिए।

कई लोगों ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए एनटीए को अपने दिशा-निर्देशों को और अधिक स्पष्ट तरीके से प्रचारित करना चाहिए ताकि अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्रों के बीच किसी प्रकार की गलतफहमी न हो।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान धार्मिक परिधान को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में हिजाब, बुर्का और अन्य पारंपरिक परिधानों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई मामलों में अदालतों तक भी मामला पहुंचा है, जहां सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देना है। इसलिए आवश्यक है कि सुरक्षा नियमों और व्यक्तिगत आस्था के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी छात्र को भेदभाव या असुविधा का सामना न करना पड़े।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में परीक्षा केंद्र प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तरफ से भी इस विशेष घटना को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में यह चर्चा शुरू हो गई है कि भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए दिशा-निर्देशों को और अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होती है और यदि ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल यह मामला धार्मिक पहचान, संवैधानिक अधिकारों और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस का विषय बन गया है।

कोई टिप्पणी नहीं